जानिए विक्रमादित्य के लोककथाओं के पिछे का सच !
#विक्रम_की_लोक_कथायें ! "शकवंश का नाश करने वाले मालव ' विक्रमादित्य ' के सम्बन्ध में कथानक में जो वर्णन है उसमें अविश्वास करने का कारण मैं नहीं देखता । बहुत से विद्वान् इस तरह के वर्णन को अविश्वास की दृष्टि से देखते हैं । क्योकि भारतीय अनुमति में उनकी धारणा अविश्वासपूर्ण होती है । कभी कभी वे भारतीय - शास्त्र की अपेक्षा विदेशी लेखकों के अत्यन्त आश्चर्य - जनक वर्णनो को भी अच्छा समझते हैं ? " -डाक्टर ' कोनो ' भारतीय कथा - किंवदन्तियों में ' विक्रमादित्य ' एक महान् दानवीर , महान् परोपकारी के रूप में चित्रित है । उनके राज्य में कोई दुःखी नहीं था , अन्नवस्त्र सभी को सुलभ था । वे विद्याव्यसनी , सत्यनिष्ट , प्रजावत्सल और उदार थे । उनके सम्बन्ध में बहुत - सी बातें ऐसी सुनने को मिलती हैं , जो न तो मनुष्य से हो सकती हैं और न जिनका कहीं आधार मिलता है । इससे विक्रमादित्य के ऊपर दैवी विश्वास करने पाली जनरुचि का पता लगता है । पाठकों के सामने कुछ ऐसी कहा नियाँ लिखी जाती हैं जिनका आधार संस्कृत की प्राचीन कथाओं में है । संस्कृत की लोकोक्ति है ' न ह्यमूला जनश्रुतिः...