वर्तमान सामयिक चिंतन... (१)
गरिब जनसमुदाय के मामलो की कथित न्यायालयों द्वारा 100 - 200 वर्ष तक सुनवाईयां पेंडिंग पडी है, वैसे ही एज्युकेशन लोन, कृषि पर कर्जा लेनेवाले गरिबो का कर्जा चुकाने की कालावधि 100 - 200 वर्ष दिर्घ क्यो नही? गरिब कृषक के विद्यार्थी सरकारी कर्जा लेकर पढे, और चुका न पाए तो खेती बेंचनी पड रही है, लेकिन हर हालत में लोन कभी मांफ नही होगा। न ही पेंडिंग हो सकता है। विद्यार्थीयों के आत्मदाह के पीछे एज्युकेशन लोन न चुका पाने का कारण भी हैं एक महत्वपूर्ण कारण रहा है। डिग्री से नोकरी मिलती नही, कौशल्य मूल माध्यमिक शिक्षा मे शामिल नही है। ये पद्धति ही भारतीय व्यवस्था को तोड़कर विद्यार्थी व किसानों की आत्महत्या, शिक्षा व स्वास्थ की अनुपलब्धता की उत्तरदायी हैं। मिया लार्ड लोगो की नेताओं अधिकारीयों के अय्याशी का ये प्रत्यक्ष प्रमाण है व कमजोर जनता के झोपड़ी तक शराब की सहज उपलब्धता व शिक्षा की अनुपलब्धता, उस मदिरामद द्वारा बौद्धिक गुलाम बन चुकी कमजोर असहाय जनता, जो कभी भी शक्तिशाली तंत्र द्वारा पिट सकती है, जेल मे सड़ सकती है। एक गांव को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने व शिक्षा के नामपर बालाएं सुदूर शहर...