संदेश

दिसंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वर्तमान सामयिक चिंतन... (१)

 गरिब जनसमुदाय के मामलो की कथित न्यायालयों द्वारा 100 - 200 वर्ष तक सुनवाईयां पेंडिंग पडी है, वैसे ही एज्युकेशन लोन, कृषि पर कर्जा लेनेवाले गरिबो का कर्जा चुकाने की कालावधि 100 - 200 वर्ष दिर्घ क्यो नही? गरिब कृषक के विद्यार्थी सरकारी कर्जा लेकर पढे, और चुका न पाए तो खेती बेंचनी पड रही है, लेकिन हर हालत में लोन कभी मांफ नही होगा। न ही पेंडिंग हो सकता है। विद्यार्थीयों के आत्मदाह के पीछे एज्युकेशन लोन न चुका पाने का कारण भी हैं एक महत्वपूर्ण कारण रहा है। डिग्री से नोकरी मिलती नही, कौशल्य मूल माध्यमिक शिक्षा मे शामिल नही है। ये पद्धति ही भारतीय व्यवस्था को तोड़कर विद्यार्थी व किसानों की आत्महत्या, शिक्षा व स्वास्थ की अनुपलब्धता की उत्तरदायी हैं। मिया लार्ड लोगो की नेताओं अधिकारीयों के अय्याशी का ये प्रत्यक्ष प्रमाण है व कमजोर जनता के झोपड़ी तक शराब की सहज उपलब्धता व शिक्षा की अनुपलब्धता, उस मदिरामद द्वारा बौद्धिक गुलाम बन चुकी कमजोर असहाय जनता, जो कभी भी शक्तिशाली तंत्र द्वारा पिट सकती है, जेल मे सड़ सकती है। एक गांव को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने व शिक्षा के नामपर बालाएं सुदूर शहर...

देशी गाय के घी का एक लाभ...

देशी गाय के घी का लाभ... "Enhanced Collagen Production"  Vitamin K, present in ghee, plays a pivotal role in stimulating collagen production. Collagen, a vital protein, ensures the skin remains firm and prevents sagging. collagen वह तत्व है जो आपके त्वचा को युवा बनाए रखता है। इसे beef मे पाया जाता है ऐसा प्रचार प्रसार किया जा रहा तो इसके नामपर महंगे प्रोडक्ट बीक रहे हैं। यथार्थ मे ये सबसे अच्छी प्रचुर मात्रा में, घी मे पाया जाता है। सीधे-सीधे आप घी सेवन करे। देशीय गाय का घृत उत्तम है। 

रामायण मे शल्य प्रसव परिच्छेद का वर्णन...

चित्र
रामायण मे शल्य प्रसव परिच्छेद का वर्णन...  संपूर्ण विश्व में आचार्य सुश्रुत फादर आफ सर्जरी कहे जाते हैं। आरंभिक अंग्रेजी काल तक भारत में ये सर्जरी नाई समूह के सर्जन कर लिया करते थे ऐसे प्रमाण भी मिलते हैं। भारतीय इतिवृत्त को आयुर्विज्ञान के आलोक में जानने-समझने वाले भलीभांति जानते हैं यहां शल्यक्रिया का आविर्भाव सुश्रुत से ही नही स्वयं आत्रेयादि आचार्यो से भी प्राचीन व अपौरुषेय है। वह परंपरा विलुप्त तो विश्वविद्यालयों के लाखों करोड़ों ग्रंथो के अनल के राख होने के संग, पुरे सनातन शिक्षा व्यवस्था समेत अंततोगत्वा गुरूकुलो को बैन लगाने पर्यंत व 1947 पश्चात से अबतक आयुर्वेद के क्षेत्र में कांग्रेस कालीन दुर्लक्ष व वर्तमान दुर्लक्ष तक कारणीभूत है। शल्य प्रसव परिच्छेद का जनक आयुर्वेद है। शल्यक्रिया सर्जरी, सिजेरियन प्रसव सबकुछ आयुर्वेद के अंग है। मौर्य सम्राट बिंदुसार तो सकुशल उनकी माता के गर्भ से शल्य प्रसव परिच्छेद द्वारा ही जन्मे। उलल है कि उनकी माता को विष दिया गया था, तब ऐसा करना पड़ा। वैसे इसकी आवश्यकता होती नही थी। ऐसे ही आपातकालीन परिस्थिति में होती थी। रामायणकाल मे हमारे भारतीय च...

Humun Female egg decide sex of child...

चित्र
मणुष्य में लिंग निर्धारण का वैज्ञानिक विश्लेषण... भारत के शरिरशास्त्र , जीवशास्त्र ( BIO ) आदि के पाठ्यक्रम में XX & XY Chromosomes के crossing के माध्यम से बढाया जाता है sex determination हमेशा पुरूष ( male ) पर निर्भर है ... ऐसा लिखने के पिछे का दृष्टिकोण ये हो सकता है कि पुरूष मे दोनो संभावनाएं हैं और स्त्री मे एक ही.. इसलिए तय तो पुरुष के गुणसूत्र से होगा लेकिन भलेही ऐसा हो फिर भी लिंग का निर्धारण तो स्त्री ही से होता है। यह भी ध्यान दिया जाए कि XX गुणसूत्र युक्त फिमेल का egg ही उन (sperm /chromosomes) का चुनाव करने का, उन्हे ग्रहण करने का निर्णय लेता है, ये वर्तमान वैज्ञानिक शोध में सिद्ध हो चुका है और सन 1917 मे ही डावसन ने इसकी पुष्टि कर दी थी। इसलिये ये कहना बिल्कुल निराधार अवैज्ञानिक व असत्य है । संक्षेप में जानिये...  वैसे हर बोर्ड मे ऐसे नही पढाया जाता। कयी राज्यों के पाठ्यपुस्तक में sex determination of child depends upon male पढाया जाता है । उनमे महाराष्ट्र बोर्ड भी शामिल है व संभवतः ncert आदि। ⦿ एक ̠D̠̠i̠̠g̠̠e̠̠s̠̠t̠ का संदर्भ लेते हैं -  ((Self-Help to ICSE ...

मणुष्य में लिंग निर्धारण का वैज्ञानिक विश्लेषण...

लिंग निर्धारण का वैज्ञानिक विश्लेषण... शरिरशास्त्र , जीवशास्त्र ( BIO ) आदि के पाठ्यक्रम में XX & XY Chromosomes के crossing के माध्यम से बढाया जाता है sex determination हमेशा पुरूष ( male ) पर निर्भर है ... लेकिन ये बिल्कुल असत्य है । क्योंकि ऐसा नहीं होता ... वैसे हर बोर्ड मे ऐसे नही पढाया जाता। कयी राज्यों के पाठ्यपुस्तक में sex determination of child depends upon male पढाया जाता है। उनमे महाराष्ट्र बोर्ड भी शामिल है व ncert आदि। एक Digest का संदर्भ लेते हैं -  ((Self-Help to ICSE Biology 10 FOR 2022 EXAMINATIONS By Priya Minhas, Sister Maria)) पृ. 36 -  Q.3 . Does the sex of the child depend on the father or it is just a matter of chance . Discuss . Ans . No , the sex of the child does not depend on parents it is just a matter of chance . Sex of the child depends upon the kind of sperm that fertilises the egg . The egg contains only one X chromosome , but half of the sperms released into the female are X - bearing and remaining half are Y - bearing . It is simply a mat...

तापमान द्वारा लिंग निर्धारण पर शोध....

तापमान द्वारा लिंग निर्धारण पर शोध....  सन् 1971 और 1972 में, पेरिस विश्वविद्यालय के एक फ्रांसीसी शोधकर्ता, क्लाउड पियाउ ने ग्रीक कछुए (टेस्टूडो ग्रेका), और यूरोपीय तालाब के कछुए (एमीज़ ऑर्बिक्युलिस) इनपर लिंग निर्धारण में तापमान के प्रभाव पर अध्ययन के परिणाम प्रकाशित किए... ग्रीक कछुए में, कम तापमान (25-30 डिग्री सेल्सियस) पर सेते हुए अंडे लगभग विशेष रूप से नर में विकसित होते हैं, और उच्च तापमान (31-35 डिग्री सेल्सियस) पर लगभग विशेष रूप से मादाओं में विकसित होते हैं। इसी तरह, यूरोपीय तालाब कछुए में, 28 डिग्री सेल्सियस से नीचे ऊष्मायन से नर बच्चे पैदा होते हैं और 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर मादाएं पैदा होती हैं, जबकि दोनों लिंग एक मध्यवर्ती तापमान पर पैदा होते हैं। यह कुछ प्रजातियों में तापमान निर्धारण की पहली अच्छी तरह से प्रलेखित और प्रकाशित रिपोर्ट थी। हालाँकि यह पेरिस युनिवर्सिटी ही थी जिसने बताया कि लिंग निर्धारण दो प्रकार के होते हैं: अधिकांश प्रजातियों में आनुवंशिक लिंग निर्धारण और कुछ प्रजातियों में तापमान लिंग निर्धारण, यह चार्नियर (1966) थे जिन्होंने तापमान लिंग निर्धारण क...

भारतीयता व नारी...

वर्तमान शिक्षा का एक बड़ा दोष यह है कि स्त्रियोंमें नारीत्व और मातृत्वका नाश होकर उनमें पुरुषत्व बढ़ रहा है और उधर पुरुषों में स्त्रीत्वकी वृद्धि हो रही है ! नारी नियमित व्यायाम करके और भाँति - भाँतिके अन्यान्य साधनोंके द्वारा ' मर्दाना ' बनती जा रही है , तो पुरुष अङ्ग लालित्य , भाव - भङ्गिमा , केश - विन्यास और स्वर - माधुर्य आदि के द्वारा ' जनाना ' बनने जा रहे हैं । स्त्रियोंमें मर्दानगी अवश्य आनी चाहिये ! उनको रणचण्डी और दशप्रहरण - धारिणी दुर्गा बनना चाहिये । परंतु बनना चाहिये पति - पुत्रका अहित करनेकी इच्छा रखनेवाले दुष्ट आततायीको दण्ड देनेके लिये ही । यह तभी होगा , जब उनमें पत्नीत्व और मातृत्वका अक्षुण्ण भाव स्थिर रहेगा । भारतवर्ष में तो नारीकी रणरङ्गिणी मुण्डमालिनी कराली कालीके रूपमें और सिंहवाहिनी महिषमर्दिनी दुर्गाके रूपमें पूजा की जाती है । परंतु वहाँ भी वह है मां ही । स्नेहमयी माता , प्रेममयी पत्नी यदि वीराङ्गना बनकर रण - सज्जा - सुसज्जित होकर मैदान में आवेगी तो वह आततायियोंके हाथसे अपनी तथा अपने पति पुत्रकी रक्षा करके समाज और देशका अपरिमित मङ्गल एवं मुख उज्ज्वल...

भारत में धार्मिक विचार का विकास नहीं , किन्तु ह्रास ही हुआ है..

भारत में धार्मिक विचार का विकास नहीं , किन्तु ह्रास ही हुआ है । उन्नति नहीं , अवनति ही हुई है । इसलिए हम यह परिणाम निकालने में न्याययुक्त हैं कि वैदिक आर्यों के उच्चतर और पवित्रतर ईश्वरादि विषयक विचार एक प्रारम्भिक ईश्वरीय ज्ञान के प्रादुर्भाव का परिणाम था ।              ~ ' टीचिंग आफ़ दी वेदाज़ ' पृ. 231                             (मौरिस फिलिप)   हम रोज अधोगति कि ओर.... असभ्यता की ओर... संस्कार - संस्कृति , धर्म और आध्यात्मिक रूप से हिन.. मानवता, नैतिक - मुल्य आदि से क्षत हो रहे हैं - यही परिलक्षित होता है जब इतिहास का अध्ययन करते हैं..... हमारे पूर्वज हमसे उच्च स्तरीय ज्ञान विज्ञान के मर्मज्ञ थे। इसका जो कारण है ईश्वरीय ज्ञान वेद से दुर होना। पहले भौतिक आत्मिक रूप से अधिक विकसित थे और अब अविकसित.....          यह अंतर स्पष्ट करता है कि संसार में सर्वप्रथम हर वस्तु का ज्ञान सिधे ईश्वर द्वारा दिया गया। संपूर्ण विश्व वेद को सबसे प्राचीन प्राचीन ग्रन्थ स्वी...

स्त्रियाँ घर की लक्ष्मी हैं.....

स्त्रियाँ घर की लक्ष्मी हैं..... प्रजनार्थं महाभागाः पूजा गृहदीप्तयः । स्त्रियः श्रियश्च गेहेषु न विशेषोऽस्ति कश्चन ॥ २६ ॥ [[ स्त्रियां ( प्रजनार्थम् ) सन्तान को उत्पन्न करके वंश को आगे बढ़ाने वाली हैं , ( महाभागाः ) स्वयं सौभाग्यशाली हैं और परिवार का भाग्योदय करने वाली हैं , ( पूजार्हा : वे पूजा अर्थात् सम्मान की अधिकारिणी हैं , ( गृहदीप्तयः ) प्रसन्नता और सुख से घर को प्रकाशित = प्रसन्न करने वाली हैं , यों समझिये कि ( गेहेषु ) घरों में ( स्त्रियः च श्रियः कश्चन विशेष : न अस्ति ) स्त्रियों और लक्ष्मी तथा शोभा में कोई विशेष अन्तर नहीं है अर्थात् स्त्रियां घर की लक्ष्मी और शोभा हैं ॥ २६ ॥]] ऋषि अर्थ – ‘ ‘ हे पुरुषो ! सन्तानोत्पत्ति के लिए महाभाग्योदय करने हारी , पूजा के योग्य , गृहाश्रम को प्रकाशित करती , सन्तानोत्पत्ति करने - कराने हारी , घरों में स्त्रियाँ हैं , वे श्री अर्थात् लक्ष्मीस्वरूप होती हैं , क्योंकि लक्ष्मी , शोभा , धन और स्त्रियों में कुछ भेद नहीं है । "  ( सं. वि. , गृहाश्रमप्रकरण ) - अनुशीलन – स्त्रियाँ लक्ष्मी रूप हैं – मनु ने जो स्थान तथा महत्त्व स्त्रियों को दिया...

भारत की सांस्कृतिक व्याख्या...

भारत की सांस्कृतिक व्याख्या.... आर्यावर्त अथवा भारतवर्ष नामक राष्ट्र कि सांस्कृतिक व्याख्या करनी हो तो ऐसी कर सकते हैं - " जिस राष्ट्र का दर्शन कहता हो मानहानिपूर्ण जीवन से अपनी तेजस्विता और मान मर्यादा के साथ मर जाना ही अच्छा है, वह राष्ट्र भारतवर्ष है।"     भारतीय कवि-विद कहते हैं -    ज्वलितं न हिरण्यरेतसं चयं आस्कन्दति भस्मनां जनः । अभिभूतिभयादसूनतः सुखं उज्झन्ति न धाम मानिनः ।।                         ~ किरातार्जुनीयम् 2/20.     अर्थात् मनुष्य राख की ढेर को तो अपने पैरो आदि से कुचल देते हैं किन्तु जलती हुई आग को नहीं कुचलते । इसी कारण से मनस्वी लोग अपने प्राणो को तो सुख के साथ छोड़ देते हैं किन्तु अपनी तेजस्विता अथवा मान-मर्यादा को नहीं छोड़ते । भारत के विषय में कहा गया है - -        गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे । अर्थात भारत जैसे देश में जन्म लेकर भी जो अपने मानव जीवन का सदुपयोग - न करे , उससे बड़ा आत्मघाती और कौन होगा ! भारतीय वाङ्मय के गम्भीर अध्येता...

धर्म, विज्ञान व अध्यात्म...

धर्म, विज्ञान व अध्यात्म तीनों ही सत्य है, परस्पर एकदूसरे के पर्यायवाची है, इनमे कोई विवाद विसंगति अपवाद नहीं । जिसे आज विज्ञान कहाँ जा रहा है अभी वो कुछ दशकों पहले ही पेड़-पौधों को निर्जीव मानता था...

यज्ञ द्वारा मर रहे पेड़ पौधे पुनः हरे-भरे क्यो हो जाते हैं...?

यज्ञ द्वारा मर रहे पेड़ पौधे पुनः हरे-भरे क्यो हो जाते हैं...?  मैने देखा कि कयी लोगो को यज्ञ द्वारा पेड-पौधो का वापिस हराभरा होना अविश्वसनीय लगा। (वो एक वर्तमान में हुई जर्मन रिसर्च है ।) स्पष्ट है कि वे विज्ञान के छात्र नही होंगे व सामान्य ज्ञान भी कम होगा। ऐसे लोगों को भी ये अवश्य जानना चाहिए कि ऐसा होने के पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है। यज्ञ हमे प्रदुषण से कैसे बचाता है? ऐसे लोग जी तो 21 वी सदी में रहे लेकिन उन्हे 70- 80 के दशक के वैज्ञानिक शोध भी नहीं पता। ये कोई नयी बात तो नही.. वायु को प्रदुषित करता "फ्लुओराइड" ऐसा विषैला तत्व है जो वृक्षों को नष्ट करता है । फ्राँस में आल्पस पर्वत में पाये जाने वाले सदाबहार वृक्ष दिनों दिन मरते और नष्ट होते जा रहे हैं । विशेषज्ञ चिन्तित हुए और खोज की तो पाया कि यह उस क्षेत्र में पाये जाने वाले कारखानों द्वारा वमित फ्लुओराइड तत्वों का दुष्प्रभाव है । इस बात की आशंका की जा रही है कि स्थिति ऐसी ही रही तो उस क्षेत्र में एक भी वृक्ष जिन्दा न बचेगा । धुएं के रूप में वायु को गन्दा करने वाला सबसे पहला विषैला तत्व 1 कार्बन मानो ऑक्साइड है। इससे...

ओशो का खंडन... प्रश्न उत्तर...

चित्र
ओशोवादी : तुम्हारी अपनी काबिलियत क्या है की तुम ओशो पर अपने विचार व्यक्त करो? ओशो की आलोचना करने के लिए तुमको ओशो से बड़ा दार्शनिक होना पड़ेगा तभी तुम कुछ कह पाओगे वरना तुम जैसे और तुम से भी बड़ी हैसियत वाले बहुत कुछ बोल चुके हैं मगर ओशो की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। उसको एक बार पढ़ो। ओशो ने सेक्स के बारे में जितना कहा है उससे कहीं अधिक मानव मनोविज्ञान पर कहा है।ओशो का सारा जोर ध्यान पर है। ध्यान करो। सनातनी : ओशो की काबिलियत से ज्यादा काबिलियत रखते हैं... ओशो एक नशेड़ी व्यभिचारी बलात्कारी था । ओशोवादी :   फिर ऐसा क्या हुआ कि आपकी कबलियत दुनिया नही समझ सकी और ओशो को इसी दुनिया ने सिर आंखों पर बिठाया? संभोग से समाधि की किताब पर ध्यान क्यों गया? आपका ध्यान भारत एक स्वर्णिम यात्रा या गहरे पानी पैठ पर क्यों नहीं गया? ओशो ने तो सब विषयों पर बोला, सभी संतो,तीर्थंकरों पर बोला, आप संभोग के विषय पर ही क्यों रुक गए? सनातनी (विचार प्रसार) :  (१) दुनिया ने उस ओछे को कब सिराखो पे बिठा दिया? और कोई दुराचारी बलात्कारी प्रसिद्ध हो भी तो? किसी भी बात को ग्रहण करने का आधार क्या है? क्या त...

क्या नशेड़ी ओशो सबसे बड़ा दार्शनिक था?

एक ओछो भक्त ने कहा कि ओछो का खंडन करने तो ओछो से बडा दार्शनिक होना पडेगा... 🤔 यानी तदनुसार ओशो सबसे बड़ा दार्शनिक था। ऋषि कपिल, पतंजलि, गौतम, कणाद, जैमिनि और बादरायण व मुनी अष्टावक्र, महावीर, बुद्ध, शंकराचार्य, ऋषि दयानंद इतने दार्शनिकों वाले आर्यावर्त भारतवर्ष में किसी ने शराब ड्रग्स पीकर रेड लाइट एरिया नही खोला क्योंकि ये क्या जाने दर्शन क्या होता है। इन्हे क्या पता था दर्शन का मर्म कि कहां समाधि होती है। सारी सृष्टि व्यर्थ इधर-उधर समाधि ईश्वर आदि खोज रही थी। तब ईश्वरकृपा से धरती पर युगो युगो मे पहली बार ओशो नामक भगवान चला आया। बोला नही.. ये कहा खोज रहे हो तुम। इसने बताया कि एक लडकी को पुरे गांव से वर चयन करने स्वयं को प्रत्येक से जो है चखवाना चाहिए, फिर जो है जिसमे आनंद आए उससे विवाह करना चाहिए, इसने बताया कि परिवार जैसी व्यवस्था विवाह संस्था समाप्त करनी चाहिए, फिर चौका दिया ये बताकर कि समाधि तो संभोग से मिलती है.. कैसे? बोले बड़ा वेश्यालय खोलना पडेगा। उसमे वो सब होगा। नशा ड्रग्स सेक्स। क्यों? तो उसने बताया कि अति सेक्स से जो है उसके प्रति अनिच्छा आएगी और फिर जो है व्यक्ति समाधि ...

ओशो की सेक्रेटरी व प्रेमिका आनंदशिला के द्वारा ओशो का खुलासा

 ओशो, पेरियार, Hरामपाल, रामरहिम आदि जैसो पर लिखना शौक नही। इनमे क्रमशः दो नाम ओशो व पेरियार इतने अश्लील गाली की भांति है कि इनका नाम लेना भी सभ्य मानव समाज मे सही नहीं। ये ऐसी गंदगी है कि वेश्यावर्ग भी इनको पढ लज्जित हो जाए। ये वे लोग है जिनका मुख देखना भी पाप है । इसलिए इनपर लिखने की कोई इच्छा नही। परंतु विवशता कहे या कर्तव्य कि इनसे वर्तमान दानवों वाममार्गी दृष्ट दस्युओं द्वारा समाज में जो इनका प्रचार कर रहे हैं, वा इनको भगवान, दार्शनिक, विद्वान आदि संबोधन दे देकर इनके Thoughts बडे बडे पेज व शोशल मिडिया हैंडल पर यदाकदा मिल ही जाएंगे, विशेषकर ओशो के वीडियो.. तो इन्हे जाने बगैर इनको भ्रमित होकर जो इनका अनुगमन करेंगे वो तो मानवता के लिए शर्मशार करने वाला ही अनर्थ होगा। समाज में ऐसे दुराचारी होंगे तो व्यभिचार बलात्कार का बोलबाला मच जाएगा। अपसंस्कृति विराष्ट्रियकरण, राष्ट्र की आत्मा अर्थात् संस्कृति का ह्रास होगा। इसलिए इनका भंडाफोड़ करना, इन्हे उजागर करना भी अनिवार्य बन जाता है। इस विचार से इस गंदगी को हाथ लगाना पड रहा है। इन सब नामो मे ओशो पर भारतीय जन बहोत कम जानते हैं। ओशो भी गिरफ...