अन्याय कितना सहे?
2.5.2024 यह संसार है। यहां मनुष्य पशु पक्षी कीड़े मकोड़े जंगली एवं समुद्री जीव जंतुओं के रूप में असंख्य जीव रहते हैं। कोई छोटा, कोई बड़ा। कोई कमजोर, कोई बलवान। कोई अधिक बुद्धिमान, कोई कम बुद्धिमान। "ये जीव स्वार्थ के कारण अथवा अविद्या के कारण एक दूसरे पर आक्रमण भी करते रहते हैं। इसलिए यहां अपनी अपनी रक्षा के लिए संघर्ष करना और अपनी रक्षा करना सबके लिए अनिवार्य है।" "जो जीव विद्या बल बुद्धि आदि में बलवान होता है, वह इन गुणों की सहायता से अपनी रक्षा कर लेता है। वह जीवित और सुरक्षित रहता है। और जिसके पास विद्या बल बुद्धि आदि गुण कम होते हैं, वह कमजोर पड़ जाता है। वह संसार में बहुत मार खाता है, और अन्त में नष्ट हो जाता है।" "यदि आप इस संसार में ठीक ढंग से जीना चाहते हों, तो आपको भी ईश्वर की कृपा से वेद आदि शास्त्रों का अध्ययन कर के, माता-पिता और गुरुजनों के अनुशासन में रहकर अपनी विद्या बल बुद्धि आदि को बढ़ाना होगा। तभी सही ढंग से आपके जीवन की रक्षा हो पाएगी।" ...